K Kabir Kapoor Love · Marathi · Romantic वो रास्ते में पलटा तो रुक गया मैं भी; फिर कदम, कदम न रहे, सफर, सफर न रहा; नज़रों से गिराया उसको कुछ इस तरह हम ने; कि वो खुद अपनी नज़रों में मुताबिर न रहा। lovepremromantic 0 likes 0 shares WhatsApp Copy