हुआ है हमें जो नया कुछ नहीं है। ये है मर्ज जिसकी दवा कुछ नहीं है। भरोसा नहीं है तुझे जानता हूँ, मगर यार मेरी खता कुछ नहीं है। बहुत शायरी से मुहब्बत है मुझको, सिवा इसके मुझको नशा कुछ नहीं है। उसे ग़म किसी का क्या महसूस होगा, जिसे आँसूओं का पता कुछ नहीं है। निचोड़ो न इतना मेरी जात को तुम, मैं खाली हूँ, मुझमें भरा कुछ नहीं है। वफ़ादार खुद को तू कहती तो है पर, मेरे यार तुझमें वफ़ा कुछ नहीं है। सभी कुछ तुम्हें सौंप बैठा हूँ अब मैं, मेरा मुझमें बाकी रहा कुछ नहीं है।
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