ग़ज़ल तेरी महफ़िल में दिवाने आये आँख वो तुझसे मिलाने आये शम्अ में जलते रहे परवाने शम्अ को हम भी जलाने आये राज़ दिल के मेरे पोशीदा रहें वो निगाहों को बताने आये तेरे दिल में भी शरर है मौजूद बात ये तुझ को बताने आये खौफ़ में क्यूँ न मुसाफ़िर हो भला जो अँधेरों को मिटाने आये
10 likes
72 shares