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Rudra Rao
Social · Marathi · Social_Awareness
आप जब खुद एक बेटी के पिता बनते है तब आपको अहसास होता है क़ि अपने दिल के टुक़डे को सही हाथो में न सौंपा जाये तो उसके दिल के भी टुकड़े हो जाते है.. आप अपनी घर की औरतो को भी वहीँ इज्जत और प्यार दीजिये। क्योंकि वो भी तो किसी के जिगर का टुकड़ा होती हैं। Save Girl child.
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